हरियाली तीज व्रत कथा | Hariyali Teej Ki Katha in Hindi | Download PDF Savan Teej Katha

Hariyali Teej Vrat Katha: सबसे प्यारे और हर्षोल्लास से भरपूर मौसम में आया है एक खास त्योहार, हरियाली तीज! जब बहार की आगमन में प्रकृति अपनी सबसे सुंदर रूपों में खिल उठती है और हर दिल को आनंद से भर देती है। हरियाली तीज का यह त्योहार विशेष रूप से भारतीय महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, जिसमें वे  अपने पतियों  की लंबी उम्र के लिए  24 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं और उनकी खुशियों की कामना करती हैं

इस ब्लॉग में, हम आपको ले जाएंगे हरियाली तीज की यह अद्भुत कहानी, जो बताएगी कि कैसे यह त्योहार भारतीय संस्कृति में महिलाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हम जानेंगे कि कैसे इस तीज के दिन महिलाएं व्रत और पूजा के साथ-साथ खुद को और अपने परिवार को आनंदित करती हैं, और कैसे यह त्योहार प्राकृतिक सौंदर्य की महिलाओं के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक बन गया है।

आइए, इस ब्लॉग के माध्यम से हम जानते हैं हरियाली तीज की उपलब्धि की कहानी, जिसमें हर्ष और उत्साह के साथ भरी हुई है, और जो हमें यह शिखाती है कि प्रियतम के साथ जुड़े रिश्तों का कैसे हमारे जीवन को सुंदर बना सकते हैं।- हरियाली तीज की कथा

Hariyali Teej katha 2023 | teej ki kahani in Hindi

teej ki kahani: हरियाली तीज  भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है  क्योंकि आज ही के दिन  भगवान शिव और मां पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था  जिसके यह मां पार्वती ने  अपने 108 बे जन्म में  भगवान शिव की  कई वर्षों तक कठोर तपस्या कर  उन्हें प्रसन्न किया था  आज के दिन महिलाएं  अपने पतियों के  लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं  और  कुंवारी कन्याएं  अपना मनचाहा वर पाने के लिए  इस  व्रत को करती है  और यह व्रत  दो प्रेमियों के लिए  सबसे खास होता है  क्योंकि इस दिन  व्रत करने से  उन्हें भगवान शिव और पार्वती   का सीधा आशीर्वाद मिलता है

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हरियाली तीज की कहानी – hariyali teej 2023 / हरियाली तीज की कथा

Haryali Teej, हरियाली तीज की शुभकामनाएं, हरियाली तीज की कहानी

एक बार भगवान शिव ने  देवी पार्वती को  उनके पिछले जन्मों की याद दिलाने के लिए  उनको तीज की कथा सुनाई थी  जब मां पार्वती को अपने पिछले जन्म का  कुछ भी स्मरण नहीं हो रहा था  जब भगवान शिव ने  मां पार्वती को  पीछे कथा सुनाई थी  और भगवान शिव ने  मां पार्वती से कहा था  कि आपने मुझे पाने के लिए  107 बार जन्म लिया था लेकिन आप  मुझे  107 बार में भी  ना पा सके  लेकिन   आपके 108  वे जन्म में  आपने  पर्वतराज हिमालय के घर  जन्म लिया  और  मुझे पति बनाने के लिए  आपने बड़ी  कठोर तपस्या की थी  

 तपस्या के दौरान आपने  अन और जल का त्याग कर दिया था और शीत, ग्रीष्म और वर्षा में बहुत कष्ट सहे आप मुझे पाने के लिए अपनी कठोर तपस्या मैं अडिग रही जिसे आप के पिता  देख कर बहुत दुखी हुए हैं  और निराश हुए  तब नारद मुनि  आपके घर  आए और उन्होंने  आपके पिता से कहा कि  मुझे भगवान विष्णु ने भेजा है  और  आपकी बेटी की तपस्या से  भगवान विष्णु  खुश हैं और  उन्होंने  शादी का प्रस्ताव भी  भेजा है 

  और नारद मुनि की  इस बात को सुनकर  आपके पिता  खुशी से झूम उठे  और आपका विवाह  भगवान विष्णु से कराने के लिए  तैयार हो गए   और नारद मुनि  ने भगवान विष्णु को  यह शुभ समाचार  सुनाया  लेकिन  जैसे इस बात का पता  आपको चला तो  आप बहुत ही निराश हो गई  और आपने अपने मन की बात है  अपनी सखी को बता दी  क्योंकि आप  मुझे पहले ही  अपना पति स्वीकार चुकी थी 

और आपकी  सखी ने आपका साथ देते हुए  आपको एक घने जंगल में छुपा दिया  जहां आप के पिता  नहीं पहुंच सकते थे  वहां आप  मुझे प्रसन्न करने के लिए  कठोर तपस्या करने लगी  लेकिन उधर  आपके पिता आपकी गायब होने की खबर सुनकर  बेहद चिंतित हो गए  और विचार करने लगे कि  अब क्या होगा  अगर इस दौरान  विष्णु जी  बारात  ले आएंगे तो।

भगवान शिव आगे बताते हुए कहते हैं कि  आपके पिता ने  आप को खोजने के लिए  तीनों लोकों को मिला दिया  लेकिन आप फिर भी नहीं मिली  आप गुफा में  रेत से शिवलिंग बनाकर  मेरी पूजा में लीन हो गई  इस बीच  मैं आपकी भक्ति से प्रसन्न हुआ  और आपकी इच्छा को पूरा करने का  निश्चय किया और इसी दौरान  आपके पिता आप को खोजते हुए  गुफा तक आ पहुंचे।

आपने बताया कि शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अधिकांश जीवन तपस्या में व्यतीत हुआ है। आज तपस्या सफल हुई, शिवजी ने मेरा पत्नी के रूप में वर्ण कर लिया। मैं एक शर्त पर आपके साथ घर जाऊंगी , जब आप मेरा विवाह शिव जी से करने के लिए राजी हो जाओगे ।

पर्वतराज हमारा विवाह कराने के लिए राजी हो गए। बाद में हमने पूरे विधि विधान से शादी कर ली। हे पार्वती! आपने जो कठोर व्रत रखा था, उसके कारण हम विवाह कर सके। जो भी स्त्री इस व्रत पूरे मन से करती है, उसे मैं मनोवांछित फल देता हूं।

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हरियाली तीज की पौराणिक कथा | Hariyali Teej Vrat Katha PDF Download

Download:- हरियाली तीज की कथा PDF

हरियाली तीज का व्रत: Hariyali Teej Vrat Katha

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निर्जला व्रत:  हरियाली तीज पर महिलाएं  निर्जला व्रत रखती है  जिसमें वह पूरे दिन  ना तो खाना खाती हैं  और ना ही पानी पीती है  और इस  उपवास को करने के लिए  बड़ी हिम्मत और शक्ति चाहिए होती है  क्योंकि यह व्रत  कठोर व्रत के रूप में भी  माना जाता है  क्योंकि मां पार्वती  ने भी  भगवान शिव को पाने के लिए  कई  वर्षों तक  बिना कुछ खाए पिए  तपस्या की थी 

 संकल्प:  हरियाली तीज की सुबह महिलाएं संकल्प लेती है कि  जिसमें वे पूरे दिन  उपवास करेंगे  और आज के दिन महिलाएं  भगवान से प्रार्थना करती हैं और उनकी पूजा करती हैं  जिनसे उनके घर में  सुख शांति  और पति की लंबी आयु हो सके  इसके लिए भी अपना व्रत  समर्पित करते हैं 

 वेशभूषा:  हरियाली तीज के दौरान महिलाएं  हरे कलर  के वस्त्र  वह  हरे कलर की चूड़ियां  पहनती है  क्योंकि भगवान शिव को हरा कलर  बेहद प्रिय है  और इस दिन भगवान प्रसन्न होकर  उन्हें आशीर्वाद देते हैं 

हरियाली तीज व्रत:  जो भी महिलाएं   इस व्रत को करती हैं  उन्हें हरियाली तीज  की कथा अवश्य सुननी चाहिए  

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हरियाली तीज की कथा | Hariyali Teej Vrat Katha

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