Shree Ganesh Chalisa | श्री गणेश चालीसा | Shree Ganesh Name in Hindi | Shree Ganesh Chalisa PDF Download 

Ganesh Chalisa PDF in Hindi:  हिंदू धर्म में  सबसे सर्वश्रेष्ठ  और बुद्धिमानी  भगवानों में  भगवान श्री गणेश भी आते हैं  जिन्हें किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले  पूजा जाता है भगवान श्री गणेश  को  विघ्न हरता  के नाम से भी जाना जाता है  पूरे भारतवर्ष में  भगवान श्री गणेश  के मंदिर अधिक देखने को मिलते हैं आज  के इस लेख में हम  भगवान श्री गणेश  चालीसा  को पीडीएफ (Ganesh Chalisa PDF Download) फॉर्मेट में  देने जा रहे हैं  जिसे आप  अपने मोबाइल  डाउनलोड कर  गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa) का पाठ  कर सकते हैं  अंत तक  हमारे साथ  आज के लेख गणेश चालीसा में बने रहे ! -Ganesh Chalisa PDF in Hindi

श्री गणेश भगवान के 12 प्रमुख नाम : Shree Ganesh Name in Hindi 

किसी भी पूजा की शुरुआत से पूर्व  श्री गणेश भगवान को ही स्मरण किया जाता है  इसी कारण  से उन्हें  प्रथम पूज्य  भी कहा जाता है  ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि  भगवान शिव के द्वारा  गणेश जी कोई आशीर्वाद प्राप्त हुआ था कि  जब भी कहीं पर  किसी भी प्रकार की पूजा होगी तो  सबसे पहले  गणेश भगवान को ही याद किया जाएगा  और इसलिए  किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले  भगवान श्री गणेश कोई स्मरण किया जाता है  भगवान श्री गणेश  के  अनेकों नाम है  लेकिन उनमें से कुछ  12 नाम प्रमुख है (Shree Ganesh Name) जिनका नाम लेने मात्र से ही  आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है  वह कुछ इस प्रकार हैं:-

  • सुमुख
  • एकदंत
  • कपिल
  • गजकर्णक
  • धूम्रकेतु
  • भालचंद्र
  • गजानन
  • लंबोदर
  • विकट
  • विघ्न-नाश
  • गणाध्यक्ष
  • विनायक

ऐसा माना जाता है कि  जो भी व्यक्ति इन  12 नामों को  स्मरण करता है तो  उसे किसी प्रकार के कष्टों का सामना नहीं करना पड़ता है और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत  जैसे   विद्या अध्ययन,  विवाह का समय,  यात्रा  मै,  कार्य को शुरुआत करने से पूर्व,  इन नामों का स्मरण करने से  आपके कार्यों में आने वाली सभी  दिक्कतें दूर होती हैं  और भगवान श्री गणेश  अंक में  भगवान गणेश के सभी 12 नामों का  पूर्ण वर्णन किया गया है  जिसको बोलने मात्र से ही  आपके सभी दुखों का नाश होता है और आपकी इच्छाएं पूर्ण होती है – Shree Ganesh Name in Hindi

भगवान श्री गणेश का श्लोक 

विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम्।

पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम्।।

इस श्लोक का अर्थ है – भगवान गणेश के 12 नामों का  जाप करने से  विद्या चाहने वाले को विद्या,  धन चाहने वाले को धन,  पुत्र  चाहने वाले को पुत्र,  और मोक्ष की इच्छा रखने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है

इन नामों के जाप करने से शिक्षा में मिलती है सफलता

भगवान श्रीगणेश को  बुद्धिमान  और सर्वश्रेष्ठ माना जाता है  और भगवान  गणेश की पूजा  करने से  आपको बुद्धि और अच्छी शिक्षा की प्राप्ति होती है  और भगवान श्री गणेश- अंक के अनुसार  ऐसा भी माना जाता है कि  जो भी व्यक्ति  अच्छी विद्या  पाना चाहता है तो  उसे  दिए हुए इन 12 नामों का  नियमित रूप से पाठ करना चाहिए  और नियमित रूप से  इसका जाप करने से  भगवान श्री गणेश की कृपा आप पर बनी रहती है  और  आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है  खास करके  विद्यार्थियों को अवश्य  भगवान श्री गणेश के  12 नामों का जाप करना चाहिए 

इन नामों का जाप करने से  होती है धन  की प्राप्ति 

भगवान श्रीगणेश को  सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है  और जो भी मनुष्य  भगवान श्री गणेश  के इन 12 नामों को  श्रद्धा के साथ  नियमित रूप से पाठ करता है तो  उसके घर से उसकी दरिद्रता  दूर होती है  और उसके घर में  धन की वर्षा होती है तथा साथ ही  सुख और समृद्धि आती है  इसलिए  जो व्यक्ति भी धन की प्राप्ति  करना चाहता है  भगवान श्री गणेश के 12 नामों का  नियमित रूप से पाठ अवश्य करना चाहिए 

संतान की प्राप्ति के लिए करें भगवान श्री गणेश के इन 12 नामों का जाप 

भगवान श्री गणेश के  यह 12 नाम  केवल नाम मात्र ही नहीं है  बल्कि इसमें  अद्भुत शक्ति होती है  जिसके जाप करने मात्र से ही  आपकी सभी मनोकामनाएं  पूर्ण होती है  और जो भी दंपति  पुत्र की इच्छा रखती है  उसे इन  भगवान श्री गणेश के 12 नामों का जाप  अवश्य करना चाहिए  ऐसा माना जाता है कि  इन नामों का जाप करने से  पुत्र  चाहने वाले को पुत्र  अवश्य मिलता है!

मोक्ष की प्राप्ति के लिए करें इन 12 नामों का जाप 

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पूर्व  सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है  और भगवान  श्री गणेश की  पूजा करने से  आपको आपके सभी पापों से  मुक्ति मिलती है  तथा आपके लिए मोक्ष के द्वार  खुल जाते हैं साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि  इन 12 नामों के जाप करने से  आपके जीवन में  सुख समृद्धि आती है  और आप को  मोक्ष की प्राप्ति  होती है

चालीसा पाठ

श्री गणेश चालीसा ~ Shree Ganesh Chalisa PDF Download 

आज इस लेख में आप  श्री गणेश चालीसा  को पढ़ने वाले हैं  और साथ ही में दिए हुए लिंक पर क्लिक करके आप  गणेश  चालीसा पीडीएफ  अपने मोबाइल में डाउनलोड कर सकते हैं  जिसे आप कभी भी  ओपन करके पढ़ सकते हैं  चलिए शुरू करते हैं  श्री गणेश चालीसा –   गणेश चालीसा पढ़ने से पहले हमारे साथ मिलकर बोलिए भगवान श्री गणेश की जय !! 

Ganesh Chalisa in Hindi Lyrics – श्री गणेश चालीसा

।। दोहा ।।

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल ।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ।।

।। चौपाई ।।

जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ।।

जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ।।

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ।।

राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ।।

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ।।

सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ।।

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता । गौरी लालन विश्व-विख्याता ।।

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे । मुषक वाहन सोहत द्वारे ।।

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुची पावन मंगलकारी ।।

एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ।।

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ।।

अतिथि जानी के गौरी सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ।।

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ।।

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ।।

गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ।।

अस कही अन्तर्धान रूप हवै । पालना पर बालक स्वरूप हवै ।।

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ।।

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ।।

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ।।

लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ।।

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ।।

गिरिजा कछु मन भेद बढायो । उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ।।

कहत लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ।।

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहयऊ ।।

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ।।

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी । सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ।।

हाहाकार मच्यौ कैलाशा । शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ।।

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटी चक्र सो गज सिर लाये ।।

बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ।।

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ।।

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ।।

चले षडानन, भरमि भुलाई । रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ।।

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ।।

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ।।

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ।।

मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ।।

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ।।

अब प्रभु दया दीना पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ।।

।। दोहा ।।

श्री गणेशा यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान ।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ।।

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश ।।

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